एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छुरीकला में महिला उत्पीड़न की हदें पार, 12–13 वर्षों से कार्यरत एससी वर्ग की महिला का वेतन, बिजली-पानी छीने जाने का आरोप, साज़िशन बाहर निकालने की धमकियों से सहमी पीड़िता…..

छुरीकला/कोरबा : एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय छुरीकला से सामने आया मामला अब केवल वेतन अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला उत्पीड़न का गंभीर प्रकरण बनता जा रहा है। विद्यालय में पिछले 12–13 वर्षों से कार्यरत अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिला सफाई कर्मचारी ने अधीक्षिका एवं प्राचार्य अर्शद अली पर लगातार साज़िशन प्रताड़ना, आर्थिक व मानसिक शोषण और अमानवीय व्यवहार के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़िता का आरोप है कि उसके ऊपर बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप थोपकर न केवल उसका वेतन रोका गया, बल्कि विद्यालय परिसर में उपलब्ध बिजली, पानी और अन्य मूलभूत सुविधाएँ भी छीन ली गईं, जिससे वह पूरी तरह असहाय स्थिति में पहुंच गई है। महिला का कहना है कि वह विद्यालय परिसर में स्थित आवास में रहकर अपनी पुत्री के साथ जीवन यापन कर रही है, लेकिन वेतन बंद होने के कारण उसकी स्थिति दिन-ब-दिन और दयनीय होती जा रही है।
पीड़िता के अनुसार, लगातार धमकियों और दबाव के चलते वह इस कदर डरी-सहमी हुई है कि यह समझ ही नहीं पा रही कि मदद के लिए आखिर जाए तो जाए कहां। उसने कहा कि वेतन नहीं मिलने से उसकी आर्थिक हालत इतनी खराब हो चुकी है कि दुख की इस घड़ी में किसी से मदद मांगना भी उसके लिए मुश्किल बना दिया गया है। मानसिक तनाव और भय के माहौल में काम करने को मजबूर यह महिला खुद को पूरी तरह अकेला महसूस कर रही है।

महिला कर्मचारी ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे कलेक्टर दर वेतनमान से वंचित रखा गया, विरोध करने पर अभद्रता, अश्लील गालियाँ और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर मानसिक रूप से तोड़ा गया। साथ ही, उसे आए दिन बेबुनियाद आरोप लगाकर विद्यालय से बाहर निकालने की धमकी दी जाती रही है, ताकि वह चुपचाप सब सहती रहे।
यह मामला यदि जांच में सही पाया जाता है, तो यह केवल श्रम कानूनों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि महिला उत्पीड़न, जातिगत अपमान और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। साथ ही, आदिवासी विकास विभाग, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है।

पीड़िता ने जिला कलेक्टर, पुलिस प्रशासन एवं संबंधित विभागों से तत्काल हस्तक्षेप, निष्पक्ष जांच, बकाया वेतन व सुविधाओं की बहाली और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल, विद्यालय प्रबंधन की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस सहमी हुई महिला और उसकी पुत्री को न्याय दिलाने के लिए कब और क्या कदम उठाता है।




