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कांग्रेस का प्रचारक बना भाजयुमो पदाधिकारी! MCB में भाजपा की नियुक्ति ने खोली संगठन की पोल….

एमसीबी में नियुक्ति ने खोली ‘पिछले दरवाज़े की राजनीति’ की परतें

मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर (MCB) :  भारतीय जनता पार्टी की “अनुशासन और निष्ठा” की राजनीति पर उस वक्त गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब भाजपा युवा मोर्चा जिला एमसीबी की नवघोषित कार्यकारिणी में एक ऐसा नाम शामिल पाया गया, जिसकी राजनीतिक पहचान हाल तक कांग्रेस के खुले समर्थक के रूप में रही है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजयुमो की हालिया घोषणा मे मध्यप्रदेश के व्यक्ति को ग्राम कोड़ा का निवासी बना करके राजनाथ को जिला सह-कोषाध्यक्ष बनाया गया है। लेकिन इस नियुक्ति के सामने आते ही संगठन के भीतर ही असहजता और असंतोष की लहर दौड़ गई है।

तस्वीरें बोल रहीं हैं बहुत कुछ

सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों में राजनाथ को मध्यप्रदेश के कोतमा विधानसभा क्षेत्र के कांग्रेस के पूर्व विधायक सुनील सराफ के साथ देखा जा सकता है। यही नहीं, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजनाथ द्वारा कोतमा विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में सक्रिय प्रचार किए जाने के दावे भी सामने आ चुके हैं।

इतना ही नहीं, छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी वे कांग्रेस प्रत्याशी विनय जायसवाल के समर्थन में प्रचार करते देखे जाने की चर्चा संगठन के भीतर लंबे समय से रही है।

सवाल जो भाजपा नेतृत्व से जवाब मांगते हैं

अब सवाल यह नहीं कि राजनाथ कौन हैं—

सवाल यह है कि

👉 क्या भाजपा की पृष्ठभूमि जाँच इतनी कमज़ोर हो चुकी है?

👉 जो व्यक्ति हालिया चुनावों में कांग्रेस के लिए प्रचार करता रहा, वह भाजयुमो का जिला पदाधिकारी कैसे बन गया?

👉 क्या यह नियुक्ति संगठनात्मक मजबूरी है या सिफारिशी राजनीति का नतीजा?

👉 किसके इशारे पर हुई यह एंट्री—भाजपा जिलाध्यक्ष या भाजयुमो जिलाध्यक्ष के करीबी होने का लाभ?

⚠️ निष्ठावान कार्यकर्ताओं में उबाल

पार्टी के लिए वर्षों से संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि

“अगर कांग्रेस के लिए काम करने वालों को सीधे पद मिलना है, तो ज़मीनी कार्यकर्ताओं की निष्ठा का क्या मूल्य रह जाता है?”

यह मामला अब सिर्फ एक पद की नियुक्ति नहीं रहा, बल्कि भाजपा की वैचारिक विश्वसनीयता और संगठनात्मक अनुशासन पर सवाल बन चुका है।

🔥 अग्निपरीक्षा में भाजपा

अब सबकी निगाहें भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर टिकी हैं—

👉 क्या इस नियुक्ति की जाँच होगी?

👉 क्या पार्टी स्पष्टीकरण या कार्रवाई करेगी?

👉 या फिर यह मामला भी बाकी विवादों की तरह खामोशी की फाइल में दबा दिया जाएगा?

एमसीबी में यह नियुक्ति भाजपा के लिए एक चेतावनी है—

क्योंकि सवाल अब सिर्फ कौन पद पर बैठा है का नहीं,

बल्कि पार्टी किस रास्ते पर जा रही है का है।

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