रिश्वतखोरी के आरोपों से घिरे थाना प्रभारी का पलटवार: सच उजागर करने वाले पत्रकार को थमाया नोटिस, उठे बड़े सवाल……

ममता यादव की खास होने
रायपुर जिला बलरामपुर के बसंतपुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बसंतपुर थाना प्रभारी ने चोरी के एक मामले में आरोपियों को बचाने के लिए रिश्वतखोरी और अवैध वसूली को अंजाम दिया। इस पूरे मामले का खुलासा एक समाचार के जरिए हुआ, जिसके सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस की कार्यशैली पर चर्चा तेज हो गई।
लेकिन मामला यहीं नहीं थमा। खबर प्रकाशित होते ही खुद आरोपों के घेरे में आए थाना प्रभारी ने बचाव की मुद्रा अपनाते हुए पत्रकार राम हरी गुप्ता को ही नोटिस थमा दिया। नोटिस में खबर को “भ्रामक, असत्य और निराधार” बताते हुए तीन दिनों के भीतर थाना उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा गया है, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सवालों के घेरे में पुलिस की कार्यशैली
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब खुद थाना प्रभारी पर गंभीर आरोप लगे हैं, तो क्या उन्हें यह अधिकार है कि वे उसी मामले में खबर प्रकाशित करने वाले पत्रकार को नोटिस भेजें? क्या यह कार्रवाई सच्चाई दबाने की कोशिश है या फिर सत्ता के दुरुपयोग का एक और उदाहरण?
“रक्षक ही बन गए भक्षक”
स्थानीय लोगों और बुद्धिजीवियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि जिन पर कानून की रक्षा की जिम्मेदारी है, वही अगर कानून को अपने फायदे के लिए मोड़ने लगें, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?
“रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं” — यह कहावत इस पूरे मामले में चरितार्थ होती नजर आ रही है।
पत्रकारिता पर दबाव?
यह घटना कहीं न कहीं स्वतंत्र पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देखी जा रही है। सवाल यह है कि क्या सच सामने लाने वालों को इस तरह डराया जाएगा?
अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले में उच्च अधिकारी क्या रुख अपनाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने आ पाएगी या नहीं।




