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मेहनत की फसल और सम्मान की कीमत-सिरमिना के किसानों ने बेचा धान…..

सिंचाई का पर्याप्त साधन नहीं होने के बाद भी बोते हैं धान की फसल

कोरबा 24 नवम्बर 2025 को जिले के पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सिरमिना में रहने वाले लगभग 80 वर्षीय किसान समुद्र राम कुर्मी, संतलाल, अनुराग जायसवाल, दिलदार साय, ग्राम कोठीखर्रा के रमेश साहू, ग्राम अटारी के रामलगन, ग्राम सिमगा के खुलेन्द्र, ग्राम घोंसरा के रामविलास ने इस वर्ष धान उपार्जन केंद्र सिरमिना में अपना पंजीयन कराया और आज केंद्र में अपनी मेहनत की फसल को बेचकर खुशी महसूस की। वे सिंचाई की सुविधा न होने के बावजूद वे वर्षों से मेहनत कर धान की फसल लेते आ रहे हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी फसल बोने वाले किसानों द्वारा जब उपार्जन केन्द्र में धान बेची जाती है तो उन्हें एक अलग ही खुशी महसूस होती है।

किसान समुद्र राम कुर्मी, संतलाल, अनुराग जायसवाल, दिलदार साय, रमेश साहू, रामलगन, खुलेन्द्र, रामविलास बताते हैं कि उनके क्षेत्र में सिंचाई का कोई साधन नहीं है, इसलिए फसल निकालना बेहद कठिन होता है। फिर भी जब मेहनत से उगाई गई फसल कटकर घर आती है, तो उनके चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलकती है। धान उपार्जन केन्द्र सिरमिना में किसान खुलेन्द्र पिता करमन ने 110 क्विंटल, रामविलास ने 112 क्विंटल, संतलाल ने 73 क्विंटल, अनुराग जायसवाल ने 70 क्विंटल, रमेश साहू ने 49 क्विंटल, रामलगन ने 60 क्विंटल धान बेचा। इन सभी किसानों ने बताया कि धान उपार्जन केंद्र सिरमिना में किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती। किसानों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को धान बेचने में बेहद सहूलियतें प्रदान की हैं। समर्थन मूल्य के साथ ही आदान सहायता राशि भी मिलती है, जिससे प्रदेश के किसानों को देश में सबसे अधिक लाभ मिलता है।

धान उपार्जन केंद्र सिरमिना के प्रभारी प्रबंधक आनंद कौशिक ने बताया कि उनके केंद्र में 1783 किसान पंजीकृत हैं। यहाँ किसानों के लिए पानी, शौचालय और छांव की समुचित व्यवस्था है। किसी को कोई असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाता है।

केंद्र में माइक्रो एटीएम की भी सुविधा उपलब्ध है, जिससे किसान तुरंत और आसानी से राशि निकाल सकते हैं। आगामी खरीदी सत्र 2025-26 के लिए 50 हजार बारदाना भी उपलब्ध रखे गए हैं, ताकि किसी तरह की कमी न हो। कठिन परिस्थितियों में मेहनत करने वाले किसान समुद्र राम कुर्मी जैसे कृषक अपने संकल्प, परिवार के सहयोग और सरकार की सुविधाओं से न केवल फसल उगाने में सफल हो रहे हैं, बल्कि सम्मानजनक मूल्य भी प्राप्त कर रहे हैं।

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