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पहाड़ों के सन्नाटे को चीरकर पहुँची विकास की सड़क, बदल गई जामभाठा-सोनारी की तकदीर..….

पीएम जनमन योजना से दूरस्थ आदिवासी अंचल में विकास की दस्तक

कोरबा, 04 मई 2026 कभी पथरीली पगडंडियों और कठिन पहाड़ी रास्तों में सिमटी जिंदगी, आज विकास की रफ्तार के साथ आगे बढ़ रही है। कोरबा विकासखंड के जामभाठा, सोनारी और आसपास के दूरस्थ पहाड़ी टोला-पारा में अब उम्मीद की नई राह बन चुकी है। वर्षों से अलग-थलग पड़े इन इलाकों में अब पक्की सड़क ने न केवल आवागमन को आसान बनाया है, बल्कि लोगों के जीवन में नया उत्साह भी भर दिया है।

अब आसान हुआ आवागमन, शिक्षा-स्वास्थ्य सेवाओं तक सीधी पहुँच

घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों के बीच बसे इन गांवों में विशेष पिछड़ी जनजाति—पहाड़ी कोरवा और पंडो परिवार पीढ़ियों से निवास कर रहे थे। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह क्षेत्र सुविधाओं के मामले में बेहद पिछड़ा था। गाँव तक पहुँचने के लिए न कोई सड़क थी, न कोई सुगम रास्ता। बारिश के मौसम में कीचड़ और फिसलन के कारण हालात और भी भयावह हो जाते थे। बीमारों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं था, वहीं बच्चों की पढ़ाई भी अक्सर बाधित होती थी।

लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर शुरू हुई पीएम जनमन योजना के तहत मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यहाँ लगभग 3.60 किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का निर्माण किया गया। कठिन पहाड़ी भू-भाग में यह निर्माण कार्य किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर प्रयासों ने इसे संभव कर दिखाया।

सड़क नहीं, जीवन बदलने वाली राह

जैसे ही सड़क गाँव तक पहुँची, लोगों के जीवन में बदलाव साफ दिखाई देने लगा। अब वाहन सीधे घर तक पहुँचते हैं, एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध है और राशन ढोने की मजबूरी खत्म हो चुकी है।

गाँव के निवासी पन साय भावुक होकर बताते हैं—

“पहले बारिश में बीमार को अस्पताल ले जाना लगभग नामुमकिन था। अब एम्बुलेंस सीधे घर तक आती है। यह सड़क हमारे लिए किसी वरदान से कम नहीं है।”

वहीं कुमारी बाई कहती हैं—

“हमारा जीवन जंगलों तक सीमित था, लेकिन अब सड़क बनने से हम भी मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। बच्चे नियमित स्कूल जा पा रहे हैं और शिक्षक भी आसानी से पहुँच रहे हैं।

प्रशासन की सक्रियता से बढ़ा भरोसा

हाल ही में कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने गाँव का दौरा कर सड़क का निरीक्षण किया। अधिकारियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में विश्वास और उत्साह दोनों बढ़ा है कि अब उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से किया जा रहा है।

विकास की नई शुरुआत

जामभाठा और सोनारी की यह कहानी सिर्फ सड़क निर्माण की नहीं, बल्कि बदलाव, विश्वास और विकास की कहानी है। यह उस नई सुबह की शुरुआत है, जहाँ अब ये गाँव अलग-थलग नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं।

जब पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक सड़क पहुँचती है, तो वह सिर्फ रास्ता नहीं बनाती—वह जिंदगी को नई दिशा देती है।

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