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सर्वोच्च न्यायालय के “समाधान समारोह-2026” से न्याय व्यवस्था को नई गति……

विशेष लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से होंगे प्रकरणों के त्वरित निराकरण

 

कोरबा, 18 मई 2026/

न्याय को आमजन तक सरल, सुलभ एवं त्वरित रूप से पहुंचाने की दिशा में भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत) 2026” का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह राष्ट्रव्यापी पहल 21 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होकर 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के साथ अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुंचेगी। इस विशेष आयोजन में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त प्रकरणों का आपसी सहमति एवं सुलह के आधार पर निराकरण किया जाएगा।

समाधान समारोह का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक मानवीय, सहज एवं सौहार्दपूर्ण बनाते हुए पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत दिलाना है। इसी उद्देश्य से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं तालुका विधिक सेवा समिति के मध्यस्थता केन्द्रों में लगातार पूर्व-सुलह बैठकों का आयोजन किया जा रहा है, जहां पक्षकारों एवं अधिवक्ताओं को संवाद और समझौते के माध्यम से समाधान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

कोरबा में प्री-सिटिंग के दौरान पक्षकारों के बीच सुलह-वार्ता का सफल प्रयास, न्यायाधीशों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा के निर्देशन में गठित प्रशिक्षित मध्यस्थ न्यायाधीशों की समिति द्वारा सुलह-वार्ता की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। पक्षकारों को व्यक्तिगत उपस्थिति अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जोड़कर सौहार्दपूर्ण वातावरण में विवादों के समाधान का प्रयास किया जा रहा है।

इसी क्रम में आज आयोजित प्री-सिटिंग में श्रीमती गरिमा शर्मा, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा तथा श्रीमती ममता भोजवानी, द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, कोरबा द्वारा उपस्थित पक्षकारों के मध्य प्रभावी सुलह-वार्ता कराई गई। न्यायाधीशों ने पक्षकारों को आपसी सहमति, समझदारी एवं सौहार्दपूर्ण समाधान के महत्व से अवगत कराते हुए राजीनामे के आधार पर प्रकरणों के त्वरित निराकरण हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्रदान किए।

“समाधान समारोह-2026” न्यायपालिका की उस संवेदनशील सोच का प्रतीक है, जिसमें न्याय केवल निर्णय तक सीमित नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, संवाद और सहमति के माध्यम से स्थायी समाधान स्थापित करने का माध्यम बनता जा रहा है। यह पहल निश्चित रूप से न्यायिक प्रक्रिया में जनविश्वास को और अधिक मजबूत करेगी तथा समाज में सौहार्द एवं न्याय की नई मिसाल स्थापित करेगी।

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