पहचान पर गर्व, शिक्षा से शक्ति और संस्कृति से समृद्धि—विश्व आदिवासी दिवस पर बदलाव का बुलंद संकल्प……
जल-जंगल-जमीन की विरासत से लेकर शिक्षा, रोजगार और अधिकारों तक—कस्तूरबा गांधी छात्रावास में गूंजा आदिवासी समाज की नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का संदेश

कोरबा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के तत्वावधान में आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति, समृद्ध परंपराओं, संवैधानिक अधिकारों, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और युवा शक्ति को नई दिशा देने के उद्देश्य से विशेष विधिक जागरूकता एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की ऐतिहासिक विरासत को नमन करते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा, कौशल, आत्मविश्वास और अधिकारों के माध्यम से आगे बढ़ने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के अध्यक्ष संतोष शर्मा के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज केवल अपनी संस्कृति और परंपराओं का संरक्षक ही नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, सामाजिक समरसता और देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सशक्त शक्ति है। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज की गौरवशाली विरासत को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और रोजगार के नए अवसरों से जोड़ा जाए।
“पहचान कमजोरी नहीं, सबसे बड़ी ताकत है”—नंदकिशोर पासवान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एवं डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल नंदकिशोर पासवान ने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि “आदिवासी समाज की पहचान उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है।” उन्होंने कहा कि सदियों से आदिवासी समाज जल, जंगल और जमीन की रक्षा करता आया है। प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की जो सीख आदिवासी समाज ने दुनिया को दी है, वह आज पूरे विश्व के लिए प्रेरणा का विषय है।
उन्होंने कहा कि अब समय है कि इस गौरवशाली विरासत को आधुनिक शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़कर नई पीढ़ी को विकास की मुख्यधारा में मजबूती से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने छात्राओं से कहा कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अपने अधिकारों को समझने, आत्मनिर्भर बनने और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल करने का सबसे प्रभावी हथियार है।
युवाओं को दिया सफलता का मंत्र—शिक्षा, कौशल और आत्मविश्वास को बनाएं हथियार
कार्यक्रम में लीगल एड डिफेंस काउंसिल के असिस्टेंट अधिवक्ता विपिन कुमार मिश्रा ने छात्राओं को शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र की बेटियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल सही मार्गदर्शन, अवसर और आत्मविश्वास की है।
उन्होंने छात्राओं से उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा, खेल, उद्यमिता, रोजगार और प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़कर अपनी प्रतिभा का परिचय देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज की मेहनत ही कल की पहचान बनाएगी और एक बेटी की सफलता पूरे परिवार के साथ-साथ पूरे समाज की दिशा बदलने की क्षमता रखती है।
“पहचान बचाइए, शिक्षा अपनाइए और आत्मविश्वास से आगे बढ़िए”
पैरा लीगल वालंटियर रमाकांत दुबे ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए छात्राओं को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विधिक सहायता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकारों की जानकारी पहुंचाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा—
“अपनी पहचान को बचाइए, शिक्षा को अपनाइए और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़िए। आपकी सफलता केवल आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की नई तस्वीर बनाएगी।”
उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षित बेटी अपने अधिकारों को समझती है, परिवार को मजबूत करती है और आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा देती है।

नशामुक्ति से लेकर महिला सशक्तिकरण तक—सामूहिक अभियान का आह्वान
कस्तूरबा गांधी आवासीय छात्रावास की अधीक्षिका निशा पाटिल सोनारे ने आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए नशामुक्ति, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सामूहिक अभियान चलाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है, जब उसकी बेटियां शिक्षित हों और युवा जागरूक हों। “जिस समाज की बेटियां शिक्षित और युवा जागरूक होंगे, उस समाज की प्रगति को कोई रोक नहीं सकता।”

उन्होंने छात्राओं से अपनी संस्कृति और परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीक को अपनाने की अपील की।
विश्व आदिवासी दिवस बना बदलाव और संकल्प का दिवस
कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित शिक्षिकाओं और छात्राओं ने आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने, शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने, युवाओं को कौशल एवं रोजगार से जोड़ने तथा नशाखोरी और अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आदिवासी समाज की शक्ति उसकी संस्कृति, प्रकृति से जुड़ाव, सामुदायिक एकता और संघर्षशीलता में निहित है। जरूरत है इस शक्ति को शिक्षा, तकनीक, कौशल और आत्मविश्वास से जोड़कर नई पीढ़ी को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की।
“विरासत पर गर्व हो, वर्तमान में संघर्ष हो और भविष्य के निर्माण का संकल्प हो—यही आदिवासी समाज की असली शक्ति है।”
विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को शिक्षा, अधिकार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की राह पर आगे बढ़ाने का मजबूत संदेश बनकर सामने आया।




