“संवाद से समाधान की ओर बढ़ता भारत”……
माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पहल — विशेष लोक अदालत 2026 का भव्य आयोजन.....

कोरबा, 14 मई 2026। देश में न्याय व्यवस्था को अधिक सरल, सुलभ, त्वरित और जनहितैषी बनाने की दिशा में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एक ऐतिहासिक एवं जनकल्याणकारी पहल करते हुए “समाधान समारोह (विशेष लोक अदालत)–2026” का आयोजन 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 को किया जा रहा है। यह आयोजन न्यायपालिका की उस संवेदनशील सोच का प्रतीक है, जिसमें आम नागरिकों को वर्षों तक न्यायालयों के चक्कर लगाने के बजाय आपसी सहमति एवं संवाद के माध्यम से त्वरित न्याय उपलब्ध कराने पर बल दिया गया है।
21, 22 एवं 23 अगस्त को लगेगा न्याय का महाकुंभ, हजारों मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निराकरण का लक्ष्य
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोरबा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस विशेष लोक अदालत में पूर्व-विवाद (Pre-Litigation) एवं न्यायालयों में लंबित विभिन्न प्रकरणों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया जाएगा। इसके लिए जिला एवं तहसील स्तर पर विशेष सुलह बैठकों का आयोजन प्रारंभ कर दिया गया है।
सुलह और समझौते से मिलेगा त्वरित न्याय
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आयोजित इस विशेष अभियान का उद्देश्य केवल मामलों का निराकरण करना नहीं, बल्कि समाज में आपसी विश्वास, सौहार्द और न्याय के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना भी है। लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को बिना अनावश्यक खर्च एवं लंबी कानूनी प्रक्रिया के शीघ्र राहत प्राप्त होगी।

न्यायपालिका की मानवीय पहल बनी उम्मीद की किरण
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में गठित न्यायिक समितियों द्वारा पक्षकारों को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर समझाइश, मध्यस्थता एवं काउंसलिंग के माध्यम से विवादों के समाधान का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में न्यायाधीशों एवं अधिवक्ताओं की सक्रिय भागीदारी न्याय व्यवस्था को और अधिक मानवीय एवं प्रभावी बना रही है।
प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती गरिमा शर्मा तथा द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती ममता भोजवानी द्वारा विभिन्न प्रकरणों में प्री-सिटिंग कर पक्षकारों के मध्य आपसी सहमति बनाने का प्रयास किया गया, जिससे अनेक मामलों के समाधान की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
जनता के लिए राहत, न्यायपालिका के लिए नई उपलब्धि
विशेष लोक अदालत–2026 को न्यायिक क्षेत्र में एक बड़े जनआंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ “वाद नहीं, संवाद” की भावना के साथ विवादों को समाप्त कर सामाजिक समरसता स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
संदेश स्पष्ट है —
“न्यायालय नहीं, समाधान चुनिए… संवाद से ही न्याय का मार्ग प्रशस्त होता है।”




