कोरबा में ‘हरे सोने’ की महक : पान की तोड़ाई और खरीदी-बिक्री का हुआ शंखनाद……
ग्रामीण अंचलों में लौटी रौनक, पान किसानों के चेहरों पर फिर खिली मुस्कान

कोरबा, 08 मई 2026 :_ कोरबा जिले के ग्रामीण अंचलों में इन दिनों “हरे सोने” यानी पान की खुशबू एक बार फिर समृद्धि और उम्मीद की नई कहानी लिख रही है। जिले के विभिन्न पान उत्पादक क्षेत्रों में पान की तोड़ाई, छंटाई और खरीदी-बिक्री का कार्य तेज़ी से प्रारंभ हो गया है। बाड़ियों से लेकर स्थानीय मंडियों तक किसानों, व्यापारियों और मजदूरों की चहल-पहल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा भर दी है।
सुबह की पहली किरण के साथ पान बाड़ियों में किसानों की सक्रियता दिखाई दे रही है। पत्तों की सावधानीपूर्वक तोड़ाई, उनकी ग्रेडिंग और बाजारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया ने पूरे क्षेत्र को जीवंत बना दिया है। वर्षों से पान उत्पादन से जुड़े किसान अब बेहतर बाजार और बढ़ती मांग के कारण उत्साहित नजर आ रहे हैं।
शासन की योजनाओं से पान किसानों को मिल रहा संबल
राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा कृषि और उद्यानिकी आधारित आजीविका को बढ़ावा देने लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं, जैविक खेती, पौध संरक्षण तथा बाजार उपलब्धता से जोड़ने के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में कृषि, उद्यानिकी एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण, फसल संरक्षण सलाह तथा उत्पादन बढ़ाने हेतु आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन की किसान हितैषी नीतियों के चलते अब ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ पान उत्पादन भी आर्थिक मजबूती का प्रमुख आधार बनता जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई गति
पान की खरीदी-बिक्री शुरू होने से केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि परिवहन, मजदूरी, पैकेजिंग और छोटे व्यापारियों को भी रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं। गांवों में बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है और स्थानीय कारोबार में तेजी देखने को मिल रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस वर्ष मौसम अनुकूल रहने और प्रशासनिक सहयोग मिलने से पान की गुणवत्ता बेहतर हुई है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है। कई किसानों ने इसे अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण सहारा बताया।
परंपरा से समृद्धि तक का सफर
कोरबा जिले में पान उत्पादन केवल खेती नहीं, बल्कि ग्रामीण संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज शासन की योजनाओं और किसानों की मेहनत के बल पर आधुनिक आर्थिक गतिविधि का स्वरूप लेती दिखाई दे रही है।
“हरे सोने” की यह महक अब गांवों में खुशहाली, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का नया संदेश दे रही है। किसानों के चेहरों पर लौटती मुस्कान इस बात का संकेत है कि सही दिशा में किए जा रहे प्रयास आने वाले समय में जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे।




