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औरंगाबाद में बारिश का कहर, जलभराव ने खोली व्यवस्था की पोल!…..

सड़कों पर सैलाब, नालियां बेहाल—जिम्मेदारों पर उठे सवाल!

बिहार/औरंगाबाद। बारिश ने जहां मौसम को सुहाना किया है, वहीं नगर क्षेत्र के कई इलाकों में जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था लोगों के लिए मुसीबत बनती नजर आ रही है। सामने आई तस्वीरें व्यवस्था की उस हकीकत को बयां कर रही हैं, जहां सड़कें जलमग्न हैं और लोगों को जमा पानी के बीच से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है।

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तस्वीरों में सड़क पर घुटनों तक पानी जैसा जलभराव दिखाई दे रहा है। आसपास नालियां और जलनिकासी व्यवस्था होने के बावजूद बारिश का पानी सड़क पर जमा होना कई सवाल खड़े कर रहा है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नालियों की समय पर सफाई और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था की गई थी, तो बारिश के बाद सड़क पर इतना पानी आखिर क्यों जमा हुआ?

जलभराव ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी

 

स्थानीय लोगों के अनुसार लगातार बारिश के बाद पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहने से आवागमन मुश्किल हो गया है। पैदल चलने वाले लोगों को पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। वहीं सड़क पर जमा गंदा पानी मच्छरों और अन्य कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कर सकता है, जिससे जलजनित एवं मच्छरजनित बीमारियों के संभावित खतरे को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है।

 

लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

अमृत मिशन 2.0 के बोर्ड के सामने जलभराव ने उठाए सवाल

 

तस्वीरों में जलभराव के बीच “अमृत मिशन 2.0” से संबंधित बोर्ड भी नजर आ रहा है। यही दृश्य अब व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। विकास योजनाओं और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावों के बीच यदि बारिश होते ही सड़कें पानी में डूब जाएं, तो आखिर योजनाओं का वास्तविक लाभ आम जनता तक कब पहुंचेगा?

 

क्या नालियों की नियमित सफाई हो रही है?

क्या जलनिकासी मार्गों की समय-समय पर जांच की जाती है?

क्या बारिश से पहले जलभराव वाले स्थानों की पहचान की गई थी?

और यदि की गई थी, तो समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?

 

ग्रामीणों में नाराजगी, प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

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जलभराव को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। लोगों की मांग है कि संबंधित नगर निकाय एवं प्रशासन मौके का निरीक्षण करे, बंद या जाम नालियों की सफाई कराए और बारिश के पानी की निकासी के लिए तत्काल प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।

 

लोगों का कहना है कि सिर्फ बोर्ड लगाने और योजनाओं के नाम बताने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जमीन पर दिखाई देने वाली जलनिकासी व्यवस्था ही विकास की वास्तविक तस्वीर बताएगी।

अब देखना होगा—कब जागेगा प्रशासन?

बारिश के बाद सड़क पर जमा पानी अब महज आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता का विषय भी बनता जा रहा है। यदि जलभराव लगातार बना रहता है तो स्थानीय स्तर पर स्वच्छता संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।

 

ऐसे में सवाल यह है कि संबंधित विभाग कब मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेगा और कब जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान करेगा?

 

तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं हालात की गंभीरता—अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी भी इन तस्वीरों को गंभीरता से लें और कागजी दावों के बजाय जमीन पर दिखाई देने वाली समस्या का समाधान करें।

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