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घोर लापरवाही या कागजी खानापूर्ति? स्वास्थ्य केंद्रों में बैंक खाते की जानकारी के लिए विभाग की फुर्ती, महीनों से मानदेय के इंतजार में सफाईकर्मी और अन्य JDS कर्मचारी!…..

कोरबा कटघोरा स्वास्थ्य विभाग का स्मरण पत्र बना बड़ा सवाल—भुगतान से पहले दस्तावेजों की दौड़, आखिर कब मिलेगा मेहनतकश कर्मचारियों को उनका लंबित मानदेय?

कोरबा /कटघोरा :- स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से बैंक खाते और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने के लिए स्मरण पत्र जारी किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं स्वास्थ्य संस्थानों में महीनों से सेवाएं दे रहे कम वेतनभोगी JDS सफाई कर्मियों, JDS चौकीदारों और JDS आयुष्मान ऑपरेटरों के मानदेय भुगतान को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी और असंतोष की स्थिति बताई जा रही है।

5 अगस्त 2026 को जारी स्मरण पत्र ने खोली प्रशासनिक प्रक्रिया की तस्वीर!

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा द्वारा जारी स्मरण पत्र में दीपका, रंजना, चाकाबूड़ा, भिलाई बाजार, छुरी, मोगरा सहित विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को साफ-सफाई मद में कार्यरत मजदूरों के बैंक खाते एवं आवश्यक विवरण तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, कोरबा तथा खंड चिकित्सा अधिकारी, कटघोरा के पूर्व निर्देशों के बावजूद अपेक्षित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

यहीं से पूरा मामला कई गंभीर सवालों को जन्म देता है।

बैंक खाते की जानकारी जुटाने में इतनी तत्परता, लेकिन मानदेय भुगतान में इतनी देरी क्यों?

 

यदि कर्मचारियों के मानदेय भुगतान के लिए बैंक खाते की जानकारी आवश्यक है, तो यह जानकारी समय रहते संकलित करना संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी भी बनती है। लेकिन जब कर्मचारी महीनों तक अपनी मेहनत की राशि का इंतजार करते रहें और उसके बाद भुगतान प्रक्रिया के लिए बैंक विवरण जुटाने हेतु स्मरण पत्र जारी करना पड़े, तो निश्चित रूप से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कागजी प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने का खामियाजा उन कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जो प्रतिदिन अस्पतालों की व्यवस्था को जमीन पर संभालने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं?

छोटा मानदेय, बड़ी जिम्मेदारी—फिर भी भुगतान के लिए इंतजार!

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल भवन और उपकरणों से संचालित नहीं होते। इनके सुचारू संचालन में सफाईकर्मी, चौकीदार और आयुष्मान ऑपरेटर जैसे कर्मचारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था, मरीजों से संबंधित आवश्यक कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं को व्यवस्थित रखने में इन कर्मचारियों की भूमिका प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देती है।

 

एक-एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों और दर्जनों गांवों की आबादी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर रहती है। ऐसे में वहां कार्यरत कर्मचारियों की जिम्मेदारी छोटी नहीं कही जा सकती।

 

विडंबना यह है कि जिन कर्मचारियों का मानदेय पहले ही नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम बताया जा रहा है, उन्हें उसी सीमित आय के लिए भी महीनों इंतजार करना पड़े तो उनके परिवारों पर आर्थिक दबाव पड़ना स्वाभाविक है।

नियमित कर्मचारी बनाम कम वेतनभोगी कर्मचारी—जवाबदेही का पैमाना भी हो समान!

स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत कम वेतनभोगी कर्मचारियों से समय पर काम की अपेक्षा की जाती है। अस्पताल की साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा और अन्य आवश्यक जिम्मेदारियों में उनकी उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब छोटे कर्मचारियों से उनकी जिम्मेदारी में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाती, तो उनके मानदेय भुगतान की प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी के लिए जवाबदेही किसकी तय होगी?

 

वहीं दूसरी ओर, नियमित कर्मचारियों की कार्य उपस्थिति और जवाबदेही को लेकर भी समय-समय पर उठने वाले सवालों की निष्पक्ष समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है। व्यवस्था में यदि जवाबदेही है तो वह सभी स्तरों पर समान रूप से दिखाई देनी चाहिए।

सिर्फ स्मरण पत्र से नहीं चलेगा काम, भुगतान की तारीख भी बतानी होगी!

प्रशासनिक पत्राचार अपनी जगह आवश्यक है, लेकिन कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल कागज नहीं बल्कि समय पर मानदेय है। यदि बैंक खाते की जानकारी या अन्य दस्तावेज भुगतान प्रक्रिया में बाधा हैं, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जानकारी कब तक संकलित होगी और लंबित मानदेय का भुगतान आखिर किस समय-सीमा में किया जाएगा।

कर्मचारियों की आर्थिक परेशानी को केवल फाइलों और पत्राचार तक सीमित रखना उचित नहीं होगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ को कमजोर कर कैसे मजबूत होगी स्वास्थ्य सेवा?

सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भवन, उपकरण और संसाधनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन अस्पतालों को प्रतिदिन सुचारू रूप से चलाने वाले छोटे कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी व्यवस्था की पूरी तस्वीर को कमजोर कर सकती है।

अस्पताल की चमकती इमारत के पीछे सफाई करने वाला कर्मचारी भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना मरीजों का उपचार करने वाला तंत्र। यदि वही कर्मचारी अपने मानदेय के लिए महीनों तक इंतजार करने को मजबूर हो, तो यह केवल एक कर्मचारी की समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक संवेदनशीलता का सवाल बन जाता है।

 

अब जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में लंबित मानदेय की वास्तविक स्थिति, भुगतान में देरी के कारण, बैंक विवरण संकलन में हुई देरी और भुगतान की संभावित समय-सीमा को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे।

 

कर्मचारियों का सवाल सीधा है—

“जब काम समय पर लिया जाता है, तो मेहनत का मानदेय समय पर क्यों नहीं दिया जाता?”

 

अब देखना होगा कि स्मरण पत्र के बाद विभागीय फाइलें कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं और महीनों से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे इन कर्मचारियों को उनका मेहनताना कब मिलता है।

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