किस्त चुकाने के बाद भी दस्तावेजों के लिए दर-दर भटक रहे ग्राहक! निजी फाइनेंस कंपनी पर अतिरिक्त वसूली के गंभीर आरोप..….
20 से 40 हजार रुपये तक अतिरिक्त रकम लेने का दावा, आरसी-एनओसी अटकी; शिकायतों के बाद भी राहत नहीं मिलने से पीड़ितों में आक्रोश

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में निजी फाइनेंस कंपनी के माध्यम से दोपहिया वाहन खरीदने वाले कई ग्राहकों की परेशानियां अब गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। ग्राहकों ने कंपनी से जुड़े कर्मचारियों पर निर्धारित किस्त की राशि से अतिरिक्त 20 हजार से लेकर 40 हजार रुपये तक वसूलने, रकम लेने के बावजूद उसे खाते में जमा नहीं करने तथा वाहन की आरसी और एनओसी जैसे जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कथित तौर पर रकम वसूली और दस्तावेजों में देरी के कारण पीड़ित ग्राहक लगातार कंपनी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
मामले ने उस समय तूल पकड़ा जब कई पीड़ितों ने सेमरा स्थित श्रीराम फाइनेंस कार्यालय पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई। बताया गया है कि कुछ ग्राहकों ने शिकायत पुस्तिका में भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन शिकायत के बाद भी उनकी समस्या का अपेक्षित समाधान नहीं हो सका। अब पीड़ितों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि ग्राहकों से ली गई अतिरिक्त रकम आखिर किस मद में और किसके माध्यम से ली गई तथा जिन रकमों की किस्त के रूप में भुगतान किया गया, वे कंपनी के खातों में जमा हुईं या नहीं।
20 हजार अतिरिक्त देने के बाद भी आरसी-एनओसी नहीं
पीड़ितों के अनुसार उन्होंने पेंड्रा के अमरपुर रोड स्थित कृष्णा मोटर्स से मोटरसाइकिल खरीदी थी, जिसका फाइनेंस श्रीराम फाइनेंस के माध्यम से कराया गया। आरोप है कि कंपनी से जुड़े कर्मचारी द्वारा निर्धारित किस्त से अलग अतिरिक्त रकम की मांग की गई और कई ग्राहकों से कथित तौर पर हजारों रुपये लिए गए।

पीड़ित बिसाहू महादेव का आरोप है कि उन्होंने नियमित रूप से अपनी किस्तें जमा कीं, इसके बावजूद उनसे करीब 20 हजार रुपये अतिरिक्त लिए गए। उनका कहना है कि अतिरिक्त रकम देने के बाद भी उन्हें आज तक वाहन की आरसी और एनओसी नहीं मिली, जिसके कारण उन्हें लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है।

इसी तरह आनंद सिंह ने आरोप लगाया कि श्रीराम फाइनेंस में कार्यरत बताए जा रहे रूपेश यादव ने उनसे करीब 20 हजार रुपये अतिरिक्त लिए, लेकिन इसके बावजूद वाहन से संबंधित जरूरी दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं अजय सिंह ने भी 20 हजार रुपये अतिरिक्त लिए जाने का आरोप लगाते हुए दस्तावेजों के लिए लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने की बात कही है।
रिफाइनेंस और खाता क्लोज कराने के नाम पर 35 हजार लेने का आरोप

मामले में गिरारी निवासी शिव कुमार चौधरी का आरोप और भी गंभीर है। उनका कहना है कि बाइक का रिफाइनेंस कराने और खाता क्लोज करने के नाम पर उनसे 35 हजार रुपये लिए गए। पीड़ित के मुताबिक उन्होंने यह रकम संबंधित कर्मचारी के पुरानी बस्ती स्थित घर जाकर उसकी पत्नी को दी थी।
शिव कुमार का दावा है कि बाद में जब उन्हें राशि कंपनी के खाते में जमा नहीं होने की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित लोगों से संपर्क करने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि रकम वापस मांगने पर उन्हें महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले में फंसाने की धमकी तक दी गई। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले में संबंधित पक्ष का जवाब सामने आना बाकी है।
कर्मचारी हटाया गया, लेकिन पीड़ितों का पैसा और दस्तावेज अब भी अटके
मामले के सामने आने के बाद कंपनी द्वारा संबंधित कर्मचारी को हटाए जाने की बात सामने आई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कर्मचारी हट जाने के बाद उन ग्राहकों की जिम्मेदारी कौन लेगा, जिनसे कथित तौर पर रकम ली गई?
पीड़ितों का कहना है कि कर्मचारी पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बावजूद उनकी समस्या खत्म नहीं हुई। वे आज भी अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने और वाहन के जरूरी दस्तावेज हासिल करने के लिए कंपनी कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
ग्राहकों का आरोप है कि यदि उन्होंने निर्धारित किस्तों के अतिरिक्त रकम किसी कर्मचारी को दी थी और वह राशि कंपनी के खाते में जमा नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना बेहद जरूरी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जिन वाहनों की किस्तें ग्राहकों ने समय पर जमा करने का दावा किया है, उनके खातों में वह भुगतान दर्ज क्यों नहीं हुआ।
‘बंटी-बबली’ की जोड़ी के दर्जनों मामलों का दावा, जांच हुई तो खुल सकते हैं कई राज!
पीड़ितों का आरोप है कि यह कोई एक-दो मामलों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि कथित तौर पर दर्जनों ग्राहकों से जुड़ी शिकायतें सामने आ रही हैं। कुछ पीड़ित इसे कथित रूप से ‘बंटी-बबली’ की जोड़ी से जोड़कर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
यदि शिकायतकर्ताओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अतिरिक्त रकम वसूली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सवाल भी उठेगा कि ग्राहकों से प्राप्त रकम का हिसाब-किताब किस स्तर पर रखा गया और कंपनी के रिकॉर्ड में भुगतान की स्थिति क्या है।
कंपनी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
पूरे घटनाक्रम ने निजी फाइनेंस कंपनियों की स्थानीय स्तर पर कार्यप्रणाली और ग्राहकों से लेन-देन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वाहन खरीदने वाला ग्राहक नियमित रूप से अपनी किस्त चुकाने के बाद यह उम्मीद करता है कि उसे समय पर आरसी, एनओसी और अन्य आवश्यक दस्तावेज मिल जाएंगे। लेकिन यदि अतिरिक्त रकम देने के बाद भी ग्राहक को दस्तावेजों के लिए महीनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ें, तो यह निश्चित रूप से गंभीर जांच का विषय बनता है।
पीड़ितों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ग्राहकों से ली गई कथित अतिरिक्त रकम का हिसाब सार्वजनिक किया जाए, लंबित किस्तों की स्थिति स्पष्ट की जाए, जिन ग्राहकों की रकम जमा नहीं हुई है उनका भुगतान रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए तथा सभी पात्र ग्राहकों को तत्काल आरसी और एनओसी उपलब्ध कराई जाए।
अब निगाहें कंपनी के जवाब और जांच पर
फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित कर्मचारी को कंपनी द्वारा हटाए जाने की बात सामने आई है, लेकिन इससे पीड़ितों की आर्थिक परेशानी खत्म नहीं हुई है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राहकों से कथित तौर पर ली गई रकम का हिसाब कौन देगा और उनके अटके दस्तावेज कब मिलेंगे?
मामले में कंपनी प्रबंधन और संबंधित कर्मचारी का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच होती है तो कथित तौर पर सामने आ रहे अन्य मामलों की भी परतें खुल सकती हैं और वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो सकता है।




