श्रवण यंत्र बना नई जिंदगी की सौगात, फिर सुनाई देने लगी अपनों की आवाज…..

कोरबा, 22 जुलाई 2026 :- कभी जो दुनिया उनके लिए लगभग खामोश हो चुकी थी, आज वही दुनिया फिर से आवाजों से गुलजार हो उठी। ग्राम चौराभाठा, दोंगामा, नोनबिर्रा की 68 वर्षीय श्रीमती परस बाई, पति स्वर्गीय बूंद राम, वर्षों से सुनने की गंभीर समस्या से जूझ रही थीं। परिवार की बातें सुन पाना तो दूर, लोगों से सामान्य बातचीत करना भी उनके लिए बेहद कठिन हो गया था। लेकिन समाज कल्याण विभाग द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराए गए श्रवण यंत्र (कान की मशीन) ने उनकी जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगा दी।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिक कल्याण योजनाएं जिले के जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत श्रीमती परस बाई के आवेदन पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें निःशुल्क श्रवण यंत्र प्रदान किया गया।
जैसे ही श्रवण यंत्र लगाया गया, वर्षों से खामोश हो चुकी दुनिया एक बार फिर आवाजों से गूंज उठी। उन्होंने पहली बार अपने परिवार के सदस्यों की आवाज स्पष्ट रूप से सुनी। अपनों की आवाज कानों में पड़ते ही उनकी आंखें खुशी से नम हो गईं। चेहरे पर लंबे समय बाद मुस्कान लौट आई और परिवार के सदस्य भी इस भावुक पल के साक्षी बन गए।
अब श्रीमती परस बाई न केवल अपने परिवार से सहजता से बातचीत कर पा रही हैं, बल्कि सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। उनका आत्मविश्वास लौटा है और वे पहले की अपेक्षा कहीं अधिक खुशहाल और सम्मानजनक जीवन जी रही हैं।
भावुक होकर उन्होंने कहा, “यह श्रवण यंत्र मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब मैं अपने परिवार की आवाज, बच्चों की बातें और आसपास की दुनिया को फिर से सुन पा रही हूँ। ऐसा लगता है जैसे मुझे नई जिंदगी मिल गई हो। इसके लिए मैं जिला प्रशासन, कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और समाज कल्याण विभाग की हृदय से आभारी हूँ।”
यह प्रेरक उदाहरण बताता है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जब सही पात्र तक पहुंचती हैं, तो वे केवल सहायता नहीं देतीं, बल्कि किसी की खोई हुई मुस्कान, आत्मविश्वास और जीवन की खुशियां भी वापस लौटा देती हैं। कोरबा जिला प्रशासन की यह पहल अनेक दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई उम्मीद और बेहतर जीवन का आधार बन रही है।




