कटघोरा वनपरिक्षेत्र के बसंतपुर एवं झालकछार बीट में वन भूमि पर अतिक्रमण का बढ़ता दायरा! कच्चे से पक्के निर्माण तक बेखौफ कब्जे, वन अमले की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल…..

कटघोरा। कटघोरा वनपरिक्षेत्र के बसंतपुर एवं झालकछार बीट में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले लगातार चर्चा का विषय बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन क्षेत्र में पहले अस्थायी झोपड़ियों के रूप में कब्जे शुरू हुए और अब कई स्थानों पर कच्चे के साथ-साथ पक्के मकानों का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रारंभिक स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। आरोप है कि कई स्थानों पर लंबे समय से निर्माण कार्य जारी रहने के बावजूद संबंधित वन अमला मूकदर्शक बना हुआ है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण का सीधा असर जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ सकता है। जिस भूमि का उपयोग वन संरक्षण और जैव विविधता के लिए होना चाहिए, वहां यदि लगातार निर्माण होते रहे तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि बसंतपुर एवं झालकछार बीट का संयुक्त राजस्व-वन सर्वे कराया जाए, वन भूमि पर हुए सभी कथित अतिक्रमणों की सूची तैयार कर सार्वजनिक की जाए तथा यदि कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि शासन एक ओर करोड़ों रुपये वन संरक्षण, पौधरोपण और हरित अभियान पर खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण नहीं रुकते, तो यह संरक्षण के प्रयासों को कमजोर करेगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग कटघोरा वनपरिक्षेत्र के बसंतपुर एवं झालकछार बीट में सामने आ रहे इन कथित अतिक्रमणों की निष्पक्ष जांच कर प्रभावी कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल शिकायतों और फाइलों तक सीमित रह जाएगा? पूरे क्षेत्र की निगाहें अब विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।




