जिला खनिज अधिकारी के निर्देश भी बेअसर? कटघोरा खनिज चौकी प्रभारी पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप……

कोरबा/कटघोरा :- खनिज गतिविधियों को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच कटघोरा खनिज चौकी की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि संबंधित मामले में जिला खनिज अधिकारी द्वारा कटघोरा खनिज चौकी प्रभारी को स्पष्ट रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि निर्देश मिलने के बावजूद मौके पर अपेक्षित वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।

मामले में सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन, टीपर सहित अन्य वाहनों को वहां से निकालने की सूचना सामने आई, लेकिन इसके बावजूद संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभागीय निर्देशों का पालन किस स्तर तक हुआ और यदि मौके पर नियमों का उल्लंघन पाया गया था तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
निर्देश हुए जारी, लेकिन कार्रवाई कहां?
सूत्रों के अनुसार मामले की जानकारी जिला खनिज अधिकारी तक पहुंचने के बाद कटघोरा खनिज चौकी प्रभारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसके बाद विभागीय स्तर पर मौके की जानकारी लेने की प्रक्रिया तो हुई, लेकिन आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय मौके पर मौजूद मशीनरी और वाहनों को हटने का अवसर मिल गया।
यदि यह आरोप सही है तो यह खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर विभागीय अधिकारी के निर्देश के बाद भी यदि मौके पर मौजूद वाहनों और मशीनों के संबंध में कार्रवाई नहीं हुई, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
मशीनें हट गईं, अब कार्रवाई का इंतजार
जेसीबी और टीपर समेत अन्य वाहनों को मौके से हटाए जाने की जानकारी के बाद अब स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का सवाल है कि यदि संबंधित स्थल पर सब कुछ नियमों के अनुरूप था तो वाहनों को हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? और यदि कोई अनियमितता नहीं थी, तो विभागीय कार्रवाई के निर्देश आखिर किस आधार पर दिए गए?
वहीं, यदि विभाग को किसी प्रकार की अवैध खनिज गतिविधि की आशंका थी, तो मौके पर मौजूद मशीनरी एवं वाहनों की जांच, दस्तावेजों का सत्यापन तथा आवश्यक वैधानिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई—यह भी जांच का विषय बन गया है।
जिला प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल
मामले में अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए जाने के बावजूद अधीनस्थ स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सवाल यह भी है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में संबंधित अधिकारी से जवाब-तलब करेगा? क्या मौके पर मौजूद जेसीबी, टीपर और अन्य वाहनों की जांच कराई जाएगी? क्या खनिज गतिविधि से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन होगा? और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कब होगी?
“कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति” के आरोपों की हो जांच
मामले ने एक बार फिर खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। यदि शिकायतों पर केवल मौके पर जाकर जानकारी लेने और मशीनरी हट जाने के बाद मामला समाप्त कर दिया जाता है, तो इससे विभाग की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराए और यह स्पष्ट करे कि जिला खनिज अधिकारी के निर्देश के बाद कटघोरा खनिज चौकी प्रभारी ने वास्तव में क्या कार्रवाई की। यदि निर्देशों की अवहेलना या लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—जब जिला खनिज अधिकारी ने कार्रवाई के निर्देश दिए थे, तो फिर कार्रवाई हुई क्यों नहीं? क्या मौके से मशीनें और वाहन हट जाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, या जिला प्रशासन जिम्मेदारी तय कर पूरे मामले की परतें खोलेगा?




