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सेवा, संवेदना और सादगी का अनूठा संगम : वरिष्ठ पत्रकार गणेश दास महंत ने अस्पताल में भोजन वितरण कर मनाया जन्मदिन…..

कटघोरा में मानवता की मिसाल बना जन्मदिन, मरीजों और परिजनों की दुआओं से गूंजा अस्पताल परिसर

कटघोरा, 10 मई 2026। आज के दौर में जहाँ जन्मदिन अक्सर चकाचौंध, आतिशबाजी और दिखावे का माध्यम बनते जा रहे हैं, वहीं कटघोरा के वरिष्ठ पत्रकार गणेश दास महंत ने अपने जन्मदिन को सेवा, संवेदना और मानवता का पर्व बनाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया।

दिनांक 10 मई 2026 को रात्रि लगभग 8 बजे, उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा पहुँचकर अस्पताल में भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों के बीच अपने हाथों से भोजन वितरित किया। इस दौरान अस्पताल का वातावरण भावुकता, अपनत्व और आशीर्वाद से भर उठा।

गरमा-गरम पूड़ी-सब्जी, चावल और खीर की खुशबू जैसे ही वार्डों तक पहुँची, मरीजों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। कई मरीजों ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय पल बताया। किसी बुजुर्ग ने हाथ उठाकर आशीर्वाद दिया तो किसी माँ की आँखें नम हो उठीं। लोगों ने कहा —

“आज ऐसा लगा मानो भगवान स्वयं भोजन लेकर हमारे बीच आए हों।”

पूरा परिवार बना सेवा-भाव का सहभागी, SJR टीम ने भी निभाई अहम भूमिका

इस पुनीत कार्य में महंत परिवार ने पूरी श्रद्धा और आत्मीयता के साथ सहभागिता निभाई।

भाई प्रकाश महंत, धर्मपत्नी रानू महंत, बहू प्रज्ञा महंत, पुत्र विद्यांश महंत तथा नन्हीं बेटियाँ वेदिका महंत एवं मिष्ठी महंत भी सेवा कार्य में पूरे उत्साह से जुटे रहे।

वहीं SJR टीम के युवाओं ने भोजन वितरण, मरीजों की सहायता और व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अस्पताल परिसर में उस समय का दृश्य किसी सामाजिक उत्सव से कम नहीं था।

जहाँ आमतौर पर जन्मदिन पर केक काटे जाते हैं, वहीं यहाँ जरूरतमंदों की थालियाँ सज रही थीं। हर परोसी गई थाली के साथ मानो इंसानियत का संदेश भी बाँटा जा रहा था।

जन्मदिन का असली अर्थ है किसी के जीवन में मुस्कान लाना” — गणेश दास महंत

इस अवसर पर भावुक होते हुए गणेश दास महंत ने कहा

“17 वर्षों की पत्रकारिता ने मुझे समाज के दर्द को करीब से देखने का अवसर दिया है। अस्पताल में भर्ती व्यक्ति और उसके परिजन किन परिस्थितियों से गुजरते हैं, इसे वही समझ सकता है जिसने वह पीड़ा देखी हो। यदि मेरे जन्मदिन के अवसर पर किसी भूखे का पेट भर जाए, किसी निराश चेहरे पर मुस्कान लौट आए, तो यही मेरे जीवन का सबसे बड़ा उपहार है। फूल-मालाएँ कुछ समय बाद मुरझा जाती हैं, लेकिन जरूरतमंदों की दुआएँ जीवनभर साथ रहती हैं।”

धर्मपत्नी रानू महंत ने भी भावुक स्वर में कहा —

“पहले हर वर्ष मंदिर जाकर पूजा-अर्चना और मित्रों के साथ केक काटकर जन्मदिन मनाते थे, लेकिन आज अस्पताल में जरूरतमंदों की सेवा कर जो आत्मिक शांति मिली, वह शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। सचमुच दुखियों की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”

कटघोरा को मिला मानवीय सोच का नया संदेश

गणेश दास महंत का यह कदम केवल एक जन्मदिन समारोह नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरक संदेश बन गया है। ऐसे समय में जब लोग दिखावे पर लाखों रुपये खर्च कर देते हैं, उन्होंने यह साबित कर दिया कि किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान लाने का सुख किसी भी भव्य आयोजन से कहीं अधिक बड़ा होता है।

उनकी यह पहल समाज को यह सीख देती है कि उत्सव केवल स्वयं की खुशी तक सीमित न होकर, दूसरों के जीवन में उम्मीद और संवेदना का प्रकाश फैलाने का माध्यम भी बन सकते हैं।

कटघोरा में सेवा और मानवता का यह अनूठा जन्मदिन लंबे समय तक लोगों के दिलों में याद किया जाएगा।

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