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घनी आबादी के बीच राइस मिल निर्माण पर बढ़ा विवाद, ग्रामसभा में NOC निरस्त करने की तैयारी!…..

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर जताई चिंता; सरपंच बोले– दबाव में जारी हुई NOC, अब ग्रामसभा में रखेंगे निरस्तीकरण का प्रस्ताव

कोरबा। जिले के ग्राम पंचायत सिंघिया के आश्रित भी ग्राम कर्रा के भादरा पारा मोहल्ला में प्रस्तावित राइस मिल को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। घनी आबादी के बीच प्रस्तावित इस उद्योग के विरोध में अब ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस स्थान पर राइस मिल का निर्माण किया जा रहा है, वहां सबसे अधिक प्रभावित होने वाले मोहल्लेवासियों से न तो कोई राय ली गई और न ही उनकी सहमति प्राप्त की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि उद्योग की स्थापना का वे विरोध नहीं करते, लेकिन किसी भी परियोजना को स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य, पर्यावरण और जनहित को ध्यान में रखकर ही स्वीकृति मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि अनुमति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही और इससे जुड़े दस्तावेजों एवं स्वीकृतियों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

घनी आबादी के बीच उद्योग, लोगों ने उठाए सवाल

भादरा पारा के लोगों का कहना है कि प्रस्तावित राइस मिल ऐसे क्षेत्र में स्थापित की जा रही है जहां बड़ी संख्या में परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस मोहल्ले पर उद्योग का सीधा प्रभाव पड़ने वाला है, उसी मोहल्ले के लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि राइस मिल का संचालन शुरू होता है तो धान की भूसी, धूल, डस्ट और अन्य महीन कण आसपास के घरों तक पहुंच सकते हैं। साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही और ध्वनि प्रदूषण से सामान्य जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है।

स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर बढ़ी चिंता

स्थानीय लोगों ने आशंका जताई है कि यदि पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण उपाय नहीं किए गए तो बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि सांस संबंधी समस्याएं, एलर्जी और आंखों में जलन जैसी परेशानियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने मांग की है कि संचालन से पहले पर्यावरणीय मानकों और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का विस्तृत परीक्षण कराया जाए।

अनुमति प्रक्रिया की जांच की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि राइस मिल की स्थापना के लिए किन दस्तावेजों के आधार पर अनुमति प्रदान की गई, क्या ग्राम पंचायत की बैठक विधिवत आयोजित हुई थी, क्या प्रस्ताव नियमानुसार पारित हुआ था और क्या सभी आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त की गई थीं।

सरपंच का दावा – दबाव में जारी करनी पड़ी NOC

इस संबंध में ग्राम पंचायत सिंघिया के सरपंच मनोज टेकाम से दूरभाष नंबर 7697379469 के माध्यम से जानकारी लिया गया तो सरपंच मनोज टेकाम ने दावा किया कि राइस मिल से संबंधित NOC सामान्य परिस्थितियों में जारी नहीं हुई। उनका आरोप है कि वार्ड क्रमांक 13 की पंच चाँदनी दीवान के पति प्रमोद दीवान द्वारा उन पर दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें NOC जारी करनी पड़ी। सरपंच ने यह भी दावा किया कि अनुमति प्रक्रिया से जुड़े कुछ दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।

सरपंच का कहना है कि उन्होंने संबंधित लोगों के सामने ग्रामीणों और भादरा पारा मोहल्लेवासियों की चिंताओं को रखा था। उनके अनुसार, लोगों ने आशंका व्यक्त की थी कि राइस मिल से निकलने वाली धूल, भूसी और अन्य प्रदूषक तत्व वर्तमान निवासियों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।

ग्रामसभा में NOC निरस्त करने का प्रस्ताव लाने की घोषणा

सरपंच ने बताया कि ग्रामीणों की आपत्तियों और जनभावनाओं को देखते हुए आगामी ग्रामसभा में राइस मिल के लिए जारी NOC को निरस्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यदि ग्रामसभा इस प्रस्ताव को पारित करती है तो उसकी प्रति एसडीएम और खाद्य विभाग सहित संबंधित विभागों को भेजी जाएगी, ताकि आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जा सके।

उच्चस्तरीय जांच और निर्माण पर रोक की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत तथा संबंधित विभागों से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच पूरी होने तक राइस मिल से संबंधित निर्माण एवं अन्य अनुमति प्रक्रियाओं पर रोक लगाई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

संबंधित पक्षों का पक्ष

समाचार लिखे जाने तक राइस मिल संचालक संजय अग्रवाल, प्रमोद दीवान तथा पंच चाँदनी दीवान का विस्तृत पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

फिलहाल पूरे मामले पर ग्रामीणों, प्रशासन और संबंधित विभागों की निगाहें टिकी हुई हैं। अब यह जांच और सक्षम अधिकारियों की कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि अनुमति प्रक्रिया नियमानुसार पूरी हुई थी या नहीं तथा ग्रामीणों द्वारा उठाई गई चिंताओं का समाधान किस प्रकार किया जाएगा।

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