तूता रायपुर में सहकारी समिति कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों का शक्ति प्रदर्शन, हजारों कर्मचारियों की हुंकार से गूंजा राजधानी का धरना स्थल…..
"हल्ला बोल... हमारी मांगे पूरी करो", "सरकार होश में आओ" के नारों से गूंजा तूता रायपुर, लंबित मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन होगा और उग्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सहकारी समितियों और समर्थन मूल्य धान खरीदी केंद्रों में कार्यरत कर्मचारियों का वर्षों से चला आ रहा आक्रोश सोमवार को राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर खुलकर सामने आया। छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ (पंजीयन क्रमांक-6685) एवं छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन, रैली और ज्ञापन कार्यक्रम में प्रदेश के लगभग सभी जिलों से पहुंचे सहकारी समिति कर्मचारी, प्रबंधक, कंप्यूटर ऑपरेटर, महिला कर्मचारी एवं पदाधिकारियों ने अपनी लंबित मांगों के समर्थन में जोरदार एकजुटता का प्रदर्शन किया।
धरना स्थल पर सुबह से ही कर्मचारियों का पहुंचना शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा परिसर हजारों कर्मचारियों की मौजूदगी से भर गया। अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे कर्मचारियों ने सरकार से अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान वातावरण लगातार नारों से गूंजता रहा।

“हल्ला बोल… हल्ला बोल…”, “हमारी मांगे पूरी करो…”, “छत्तीसगढ़ सरकार होश में आओ…”, “वादा निभाओ… न्याय दिलाओ…” जैसे नारों के बीच कर्मचारियों ने शांतिपूर्ण ढंग से रैली निकालकर शासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने शासन के नाम संबंधित अधिकारियों को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि सहकारी समिति कर्मचारियों एवं धान खरीदी केंद्रों में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों की सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, लंबित मांगों के निराकरण तथा कार्य परिस्थितियों में सुधार के संबंध में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की पूरी व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने में सहकारी समिति कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। किसानों के पंजीयन से लेकर धान खरीदी, रिकॉर्ड संधारण, ऑनलाइन डेटा एंट्री, भुगतान प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक कार्यों में यही कर्मचारी दिन-रात अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं। इसके बावजूद उनकी अनेक मांगें लंबे समय से लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने पूर्व में भी कई बार शासन का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित किया, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं मिल पाया है। इसी कारण प्रदेशभर के कर्मचारियों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का निर्णय लिया।
संघ के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शासन द्वारा समय रहते कर्मचारियों की न्यायोचित मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस एक दिवसीय आंदोलन में रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, धमतरी, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, कोरबा, सरगुजा, बस्तर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में कर्मचारी पहुंचे। कोरबा जिले से भी सहकारी समिति कर्मचारी, प्रबंधक एवं कंप्यूटर ऑपरेटर बड़ी संख्या में शामिल हुए और शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
धरना-प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अपनी न्यायसंगत मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाना है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन कर्मचारियों के ज्ञापन पर कितना शीघ्र और कितना सकारात्मक निर्णय लेता है।




